pablo neruda, tonight i can write the saddest lines

नेरूदा से संवाद और उदासतम पंक्तिय

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नेरूदा से संवाद और उदासतम पंक्तियाँ

सुनो नेरूदा! तुम्हारी कवितायेँ बसती हैं मेरे ह्रदय में

तुम्हारा नाम सुन मैं विह्वल हो जाता हूँ

मेरे ज़हन में कौंध जाते है वो मजदूर

जो तुम्हे अपनी जेबों में भर काले खदानों में उतर जाते थे

पर नेरूदा! जिस रात तुमने सबसे उदास पंक्तियाँ लिखी

मेरे पास उससे भी काली रात है, उदासी उससे इतनी ज्यादा नेरूदा

कि मेरी कलम खून की उल्टियाँ करते आगे बढती है

पर तुमसे ही मैंने सीखा है कलम से उदासी को बहा देना

तुम्हारी उदास रात नेरूदा आकाश बिखरा है, तारे नीले है कांपते है

मेरी काली रात नेरुदा..आसमान मेरा मूंह चिढ़ाता है

तारे समूह बनाकर मेरे अकेलेपन पर हँसते हैं

साथ तुम्हारे हवा गाती थी फिर भी, मेरे पीछे कानाफूसी करती है, हंसती है मुझपर

तुमने लिखी उदास पंक्तियाँ कि तुम प्रेम करते थे उससे और कभी वो तुमसे

मेरी प्रेम कथा में नेरूदा वह ‘कभी’… कभी ना आ पाया

तुमने ऐसी किसी रातों में, उसे छुआ था, भर लिया था बाहों में

मैं रतजगा हूँ नेरूदा! रात भर कम्बल से बाहर  निकले उसके गेसुओं को बस ताकता  हूँ

उसे छू भी नहीं सकता नेरूदा..कि उसकी नींद में खलल पड़ती है

तुम्हें अपनी प्रेयसी के आँखों से प्रेम था, मैं अपनी प्रेयसी के आँखों का प्यासा हूँ

वो आँखें चुरा लेती है नेरूदा! और और मैं एक पालतू श्वान बनकर

अपने मालिक के आँखों में खुद के लिए उसी पानी को तरसता हूँ, जिससे लबरेज़ हैं मेरी आँखें

तुम उदास हो सोचकर कि ‘अब’ तुमने उसे खो दिया, अब वो तुम्हारी नहीं

मेरी प्रेमकथा में नेरूदा, मैं उसमे खोता गया, वो मेरी कभी थी ही नहीं

कभी पत्थर पर आंसू बहा तुमने किसी रात पिघलाने की कोशिश की है ?

रातें गिन नहीं सकता नेरूदा जबसे इस रतचर्या को जीता हूँ

तुम्हारी उदास रात नेरूदा..दूर कोई गाता है

मेरी काली रात नेरूदा..बाँसवन का सियार हँसता है, हुहुवाता है

तुम्हारी उदास रात नेरूदा, तुम्हारी आँखें उसे तलाशती है

मेरी काली रात नेरूदा.. तलाशने के अधिकार से भी मैं वंचित हुआ

तुम डरे हुए हो नेरूदा, उसके चुम्बन आलिंगन किसी और के हो जायेंगे

मेरी प्रेम कथा में नेरूदा, मैं उस शख्स से हर शाम मुस्कुराते मिलता हूँ

अपनी कविता की आखिरी पंक्तियों में नेरूदा, तुम घोषणा करते हो

कि ये आखिरी शब्द है जो तुमने उसके लिए लिखे

मेरी  काली रात नेरूदा, मैं जानता हूँ

मेरी कलम की नींब आजीवन उसकी क़ैद में होगी

और ऊपर लिखे शब्द आखिरी नहीं हो सकते नरूदा जो मैंने उसके लिए लिखे

ना ही आखिरी होंगे ये जो मैं लिखने वाला हू

मेरी उदासतम पंक्तियाँ नेरूदा एक खाली सफ़ेद पन्ना हैं

जो बीच से मेरी आंसुओं से गला है सडा हैं

उस रात कहाँ कुछ लिख पाया था नेरूदा

जो लिख देता सब कुछ तो यक़ीनन, मैं भी तुम ना बन जाता !

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